अनादि मी.. अनंन्त मी..
सचेतन.. जीवन्त मी..
स्थिर सागरपरि.. अव्यक्त काहुर मी..
स्रुजनशिल गर्भतिल.. अस्पर्श चाहुल मी..
ग़ुदमरत्या श्वासातिल.. स्पर्शाची ओढ मी..
अस्पर्श.. कातर.. अशांत.. गुढ मी..
निसरड्या वाटेवर.. थरथरते पाउल मी..
ओठना भिजवत्या.. ओठांची ओल मी..
कोसळत्या धारांत.. धगधगति आग मी..
निद्रिस्त स्वप्नांना.. आलेली जाग मी..
एकाकी वाटेची.. साद एक आर्त मी..
एक थेम्ब झेलु दे.. श्रान्त मि त्रुशार्त मी..
श्वासांत झीरपता.. रानाचा गन्ध मी..
ऊन्मत्त.. उसळती.. लाट बेबन्द मी..
निर्जिव फ़त्तरात.. अवतरति जलधारा मी..
अंगभर शिरशिरि.. पिसाटलेला वारा मी..
काळोख्या रात्रीची.. धुसर धुन्द पहाट मी..
कधी एकटी.. दिशाहीन.. भरकटणारी वाट मी..
पाण्यावर वाहता.. उन्हाचा तवंग मी..
स्वतःतच हरवलेली.. स्वतःतच दंग मी..
1 comment:
jhakas...Kya baat hai..
Sunder
Post a Comment